भजन संहिता 51:1-7

भजन संहिता 51:1-7 HINCLBSI

हे परमेश्‍वर, तू करुणामय है; मुझ पर कृपा कर। मेरे अपराधों को मिटा दे, क्‍योंकि तेरा अनुग्रह असीम है। मेरे अधर्म से मुझे पूर्णत: धो, मेरे पाप से मुझे शुद्ध कर। मैं अपने अपराधों को जानता हूँ; मेरा पाप निरन्‍तर मेरे समक्ष रहता है। तेरे विरुद्ध, तेरे ही विरुद्ध मैंने पाप किया है। और वही किया जो तेरी दृष्‍टि में बुरा है। इसलिए तू अपने निर्णय में निर्दोष, और न्‍याय में निष्‍पक्ष है। मैं अधर्म में उत्‍पन्न हुआ था; और पाप में मेरी मां ने मुझे गर्भ में धारण किया था। तू अंत:करण की सच्‍चाई से प्रसन्न होता है; अत: मेरे हृदय को ज्ञान की बातें सिखा। जूफा की डाली से मुझे शुद्ध कर; तब मैं पवित्र हो जाऊंगा। मुझे धो तो मैं हिम से अधिक श्वेत बनूंगा।