भजन संहिता 139:13-24

भजन संहिता 139:13-24 HINCLBSI

तूने ही मेरे भीतरी अंगों को बनाया है, मेरी मां के गर्भ से तूने मेरी रचना की है। मैं तेरी सराहना करता हूं, क्‍योंकि तू भय-योग्‍य और अद्भुत है तेरे कार्य कितने आश्‍चर्यपूर्ण हैं! तू मुझे भली भांति जानता है। जब मैं गुप्‍त स्‍थान में बनाया गया, पृथ्‍वी के निचले स्‍थान में बुना गया, तब मेरा कंकाल तुझसे छिपा न रहा। तेरी आंखों ने मेरे भ्रूण को देखा; तेरी पुस्‍तक में सब कुछ लिखा था, दिन भी रचे गये थे, जब वे दिन अस्‍तित्‍व में नहीं थे। हे परमेश्‍वर, तेरे विचार मेरे प्रति कितने मूल्‍यवान हैं। उनका योग कितना बड़ा है! यदि मैं उनको गिनूं, तो मुझे ज्ञात होगा कि वे धूलकण से भी अधिक हैं; जब मैं जागता हूं, तब भी मैं तेरे साथ हूं। हे परमेश्‍वर, भला होता कि तू दुर्जन को मारता, और हत्‍यारे मुझसे दूर हो जाते। वे द्वेषपूर्वक तेरा अनादर करते हैं, वे बुराई के लिए तेरे विरुद्ध स्‍वयं को उन्नत करते हैं! हे प्रभु, तुझसे बैर करनेवालों से क्‍या मैं बैर न करूं? तेरे विरोधियों के प्रति क्‍या मैं शत्रु-भाव न रखूं? मैं उनसे हृदय से घृणा करता हूं, मैं उनको अपना ही शत्रु समझता हूं। हे परमेश्‍वर, मुझे परख और मेरा हृदय पहचान, मुझे जांच और मेरे विचारों को जान! मुझे देख, क्‍या मैं कुमार्ग पर चल रहा हूं? प्रभु, मुझे शाश्‍वत मार्ग पर ले चल!