मगर में तुम से सच-सच कहता हूं, मेरा यहां से रुख़्सत हो जाना तुम्हारे हक़ में बेहतर साबित होगा। क्यूंके अगर मैं न जाऊंगा, तो वह मददगार तुम्हारे पास नहीं आयेगा; लेकिन अगर मैं चला जाऊंगा, तो उसे तुम्हारे पास भेज दूंगा। जब वह मददगार आयेगा, तो वह दुनिया को गुनाह और रास्तबाज़ी, और इन्साफ़ की बाबत दुनिया को मुजरिम ठहरायेगा