मत्ती 17:14-27

मत्ती 17:14-27 पवित्र बाइबल (HERV)

जब यीशु भीड़ में वापस आया तो एक व्यक्ति उसके पास आया और उसे दंडवत प्रणाम करके बोला, “हे प्रभु, मेरे बेटे पर दया कर। उसे मिर्गी आती है। वह बहुत तड़पता है। वह आग में या पानी में अक्सर गिरता पड़ता रहता है। मैं उसे तेरे शिष्यों के पास लाया, पर वे उसे अच्छा नहीं कर पाये।” उत्तर में यीशु ने कहा, “अरे भटके हुए अविश्वासी लोगों, मैं कितने समय तुम्हारे साथ और रहूँगा? कितने समय मैं यूँ ही तुम्हारे साथ रहूँगा? उसे यहाँ मेरे पास लाओ।” फिर यीशु ने दुष्टात्मा को आदेश दिया और वह उसमें से बाहर निकल आयी। और वह लड़का तत्काल अच्छा हो गया। फिर उसके शिष्यों ने अकेले में यीशु के पास जाकर पूछा, “हम इस दुष्टात्मा को बाहर क्यों नहीं निकाल पाये?” यीशु ने उन्हें बताया, “क्योंकि तुममें विश्वास की कमी है। मैं तुमसे सत्य कहता हूँ, यदि तुममें राई के बीज जितना भी विश्वास हो तो तुम इस पहाड़ से कह सकते हो ‘यहाँ से हट कर वहाँ चला जा’ और वह चला जायेगा। तुम्हारे लिये असम्भव कुछ भी नहीं होगा।” जब यीशु के शिष्य आए और उसके साथ गलील में मिले तो यीशु ने उनसे कहा, “मनुष्य का पुत्र, मनुष्यों के द्वारा ही पकड़वाया जाने वाला है, जो उसे मार डालेंगे। किन्तु तीसरे दिन वह फिर जी उठेगा!” इस पर यीशु के शिष्य बहुत व्याकुल हुए। जब यीशु और उसके शिष्य कफ़रनहूम में आये तो मन्दिर का दो दरम कर वसूल करने वाले पतरस के पास आये और बोले, “क्या तेरा गुरु मन्दिर का कर नहीं देता?” पतरस ने उत्तर दिया, “हाँ, वह देता है।” और घर में चला आया। पतरस से बोलने के पहले ही यीशु बोल पड़ा, उसने कहा, “शमौन, तेरा क्या विचार है? धरती के राजा किससे चुंगी और कर लेते हैं? स्वयं अपने बच्चों से या दूसरों के बच्चों से?” पतरस ने उत्तर दिया, “दूसरे के बच्चों से।” तब यीशु ने उससे कहा, “यानी उसके बच्चों को छूट रहती है। पर हम उन लोगों को नाराज़ न करें इसलिये झील पर जा और अपना काँटा फेंक और फिर जो पहली मछली पकड़ में आये उसका मुँह खोलना तुझे चार दरम का सिक्का मिलेगा। उसे लेकर मेरे और अपने लिए उन्हें दे देना।”

मत्ती 17:14-27 पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI) (HINCLBSI)

जब वे जनसमूह के पास पहुँचे तब एक मनुष्‍य आया। वह येशु के सामने घुटने टेक कर बोला, “प्रभु! मेरे पुत्र पर दया कीजिए। वह मिरगी का रोगी है। जब उसे दौरा पड़ता है, तब उसे बहुत कष्‍ट होता है। वह अक्‍सर आग या पानी में गिर जाता है। मैं उसे आपके शिष्‍यों के पास लाया, किन्‍तु वे उसे स्‍वस्‍थ नहीं कर सके।” येशु ने कहा, “अविश्‍वासी और भ्रष्‍ट पीढ़ी! मैं कब तक तुम्‍हारे साथ रहूँगा? कब तक तुम्‍हें सहता रहूँगा? उसे मेरे पास लाओ।” येशु ने भूत को डाँटा और वह उस में से निकल गया। वह लड़का उसी घड़ी स्‍वस्‍थ हो गया। बाद में शिष्‍यों ने एकान्‍त में येशु के पास आ कर पूछा, “हम लोग उसे क्‍यों नहीं निकाल सके?” येशु ने उन से कहा, “अपने विश्‍वास की कमी के कारण। मैं तुम से सच कहता हूँ − यदि तुम्‍हारा विश्‍वास राई के दाने के बराबर भी हो, तो यदि तुम इस पहाड़ से यह कहोगे, ‘यहाँ से वहाँ हट जा’, तो यह हट जाएगा; और तुम्‍हारे लिए कुछ भी असम्‍भव नहीं होगा। [परन्‍तु भूतों की यह जाति प्रार्थना तथा उपवास के सिवा किसी और उपाय से नहीं निकाली जा सकती]।” जब वे गलील प्रदेश में एकत्र हुए तब येशु ने अपने शिष्‍यों से कहा, “मानव-पुत्र मनुष्‍यों के हाथ पकड़वाया जाने वाला है। वे उसे मार डालेंगे, परन्‍तु वह तीसरे दिन जीवित हो उठेगा”। यह सुन कर शिष्‍यों को बहुत दु:ख हुआ। जब वे कफरनहूम नगर में आये, तब मन्‍दिर का कर उगाहने वालों ने पतरस के पास आ कर पूछा, “क्‍या तुम्‍हारे गुरु मन्‍दिर का कर नहीं देते?” उसने उत्तर दिया, “हाँ, देते हैं।” जब पतरस घर पहुँचा, तो उसके कहने से पहले ही येशु ने पूछा, “सिमोन! तुम्‍हारा क्‍या विचार है? दुनिया के राजा किन लोगों से चुंगी या कर लेते हैं? अपने ही पुत्रों से या परायों से?” पतरस ने उत्तर दिया, “परायों से।” इस पर येशु ने उससे कहा, “तब तो पुत्र कर से मुक्‍त हैं। फिर भी हम उन लोगों के लिए बुरा उदाहरण न बनें; इसलिए तुम झील के किनारे जा कर बंसी डालो। जो मछली पहले फँसेगी, उसे पकड़ लेना और उसका मुँह खोलना। उसमें तुम्‍हें चाँदी का एक सिक्‍का मिलेगा। उसे ले लेना और मेरे तथा अपने लिए उन को दे देना।”

मत्ती 17:14-27 Hindi Holy Bible (HHBD)

जब वे भीड़ के पास पहुंचे, तो एक मनुष्य उसके पास आया, और घुटने टेक कर कहने लगा। हे प्रभु, मेरे पुत्र पर दया कर; क्योंकि उस को मिर्गी आती है: और वह बहुत दुख उठाता है; और बार बार आग में और बार बार पानी में गिर पड़ता है। और मैं उस को तेरे चेलों के पास लाया था, पर वे उसे अच्छा नहीं कर सके। यीशु ने उत्तर दिया, कि हे अविश्वासी और हठीले लोगों मैं कब तक तुम्हारे साथ रहूंगा? कब तक तुम्हारी सहूंगा? उसे यहां मेरे पास लाओ। तब यीशु ने उसे घुड़का, और दुष्टात्मा उस में से निकला; और लड़का उसी घड़ी अच्छा हो गया। तब चेलों ने एकान्त में यीशु के पास आकर कहा; हम इसे क्यों नहीं निकाल सके? उस ने उन से कहा, अपने विश्वास की घटी के कारण: क्योंकि मैं तुम से सच कहता हूं, यदि तुम्हारा विश्वास राई के दाने के बराबर भी हो, तो इस पहाड़ से कह स को गे, कि यहां से सरककर वहां चला जा, तो वह चला जाएगा; और कोई बात तुम्हारे लिये अन्होनी न होगी। जब वे गलील में थे, तो यीशु ने उन से कहा; मनुष्य का पुत्र मनुष्यों के हाथ में पकड़वाया जाएगा। और वे उसे मार डालेंगे, और वह तीसरे दिन जी उठेगा। इस पर वे बहुत उदास हुए॥ जब वे कफरनहूम में पहुंचे, तो मन्दिर के लिये कर लेने वालों ने पतरस के पास आकर पूछा, कि क्या तुम्हारा गुरू मन्दिर का कर नहीं देता? उस ने कहा, हां देता तो है। जब वह घर में आया, तो यीशु ने उसके पूछने से पहिले उस से कहा, हे शमौन तू क्या समझता है पृथ्वी के राजा महसूल या कर किन से लेते हैं? अपने पुत्रों से या परायों से? पतरस ने उन से कहा, परायों से। यीशु ने उस से कहा, तो पुत्र बच गए। तौभी इसलिये कि हम उन्हें ठोकर न खिलाएं, तू झील के किनारे जाकर बंसी डाल, और जो मछली पहिले निकले, उसे ले; तो तुझे उसका मुंह खोलने पर एक सिक्का मिलेगा, उसी को लेकर मेरे और अपने बदले उन्हें दे देना॥

मत्ती 17:14-27 पवित्र बाइबिल OV (Re-edited) Bible (BSI) (HINOVBSI)

जब वे भीड़ के पास पहुँचे, तो एक मनुष्य उसके पास आया, और घुटने टेक कर कहने लगा, “हे प्रभु, मेरे पुत्र पर दया कर! क्योंकि उसको मिर्गी आती है, और वह बहुत दु:ख उठाता है; और बार–बार आग में और बार–बार पानी में गिर पड़ता है। मैं उसको तेरे चेलों के पास लाया था, पर वे उसे अच्छा नहीं कर सके।” यीशु ने उत्तर दिया, “हे अविश्‍वासी और हठीले लोगो, मैं कब तक तुम्हारे साथ रहूँगा? कब तक तुम्हारी सहूँगा? उसे यहाँ मेरे पास लाओ।” तब यीशु ने दुष्‍टात्मा को डाँटा, और वह उसमें से निकल गई; और लड़का उसी घड़ी अच्छा हो गया। तब चेलों ने एकान्त में यीशु के पास आकर कहा, “हम उसे क्यों नहीं निकाल सके?” उसने उनसे कहा, “अपने विश्‍वास की घटी के कारण, क्योंकि मैं तुम से सच कहता हूँ, यदि तुम्हारा विश्‍वास राई के दाने के बराबर भी हो, तो इस पहाड़ से कह सकोगे, ‘यहाँ से सरककर वहाँ चला जा’, तो वह चला जाएगा; और कोई बात तुम्हारे लिये असम्भव न होगी। [पर यह जाति बिना प्रार्थना और उपवास के नहीं निकलती।]” जब वे गलील में थे, तो यीशु ने उन से कहा, “मनुष्य का पुत्र मनुष्यों के हाथ में पकड़वाया जाएगा; वे उसे मार डालेंगे, और वह तीसरे दिन जी उठेगा।” इस पर वे बहुत उदास हुए। जब वे कफरनहूम पहुँचे, तो मन्दिर का कर लेनेवालों ने पतरस के पास आकर पूछा, “क्या तुम्हारा गुरु मन्दिर का कर नहीं देता?” उसने कहा, “हाँ, देता है।” जब वह घर में आया, तो यीशु ने उसके पूछने से पहले ही उससे कहा, “हे शमौन, तू क्या सोचता है? पृथ्वी के राजा महसूल या कर किन से लेते हैं? अपने पुत्रों से या परायों से?” पतरस ने उससे कहा, “परायों से।” यीशु ने उस से कहा, “तो पुत्र बच गए। तौभी इसलिये कि हम उन्हें ठोकर न खिलाएँ, तू झील के किनारे जाकर बंसी डाल, और जो मछली पहले निकले, उसे ले; उसका मुँह खोलने पर तुझे एक सिक्‍का मिलेगा, उसी को लेकर मेरे और अपने बदले उन्हें दे देना।”

मत्ती 17:14-27 इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019 (IRVHIN)

जब वे भीड़ के पास पहुँचे, तो एक मनुष्य उसके पास आया, और घुटने टेककर कहने लगा। “हे प्रभु, मेरे पुत्र पर दया कर! क्योंकि उसको मिर्गी आती है, और वह बहुत दुःख उठाता है; और बार बार आग में और बार बार पानी में गिर पड़ता है। और मैं उसको तेरे चेलों के पास लाया था, पर वे उसे अच्छा नहीं कर सके।” यीशु ने उत्तर दिया, “हे अविश्वासी और हठीले लोगों, मैं कब तक तुम्हारे साथ रहूँगा? कब तक तुम्हारी सहूँगा? उसे यहाँ मेरे पास लाओ।” तब यीशु ने उसे डाँटा, और दुष्टात्मा उसमें से निकला; और लड़का उसी समय अच्छा हो गया। तब चेलों ने एकान्त में यीशु के पास आकर कहा, “हम इसे क्यों नहीं निकाल सके?” उसने उनसे कहा, “अपने विश्वास की कमी के कारण: क्योंकि मैं तुम से सच कहता हूँ, यदि तुम्हारा विश्वास राई के दाने के बराबर भी हो, तो इस पहाड़ से कह सकोगे, ‘यहाँ से सरककर वहाँ चला जा’, तो वह चला जाएगा; और कोई बात तुम्हारे लिये अनहोनी न होगी। [पर यह जाति बिना प्रार्थना और उपवास के नहीं निकलती।]” जब वे गलील में थे, तो यीशु ने उनसे कहा, “मनुष्य का पुत्र मनुष्यों के हाथ में पकड़वाया जाएगा। और वे उसे मार डालेंगे, और वह तीसरे दिन जी उठेगा।” इस पर वे बहुत उदास हुए। जब वे कफरनहूम में पहुँचे, तो मन्दिर के लिये कर लेनेवालों ने पतरस के पास आकर पूछा, “क्या तुम्हारा गुरु मन्दिर का कर नहीं देता?” उसने कहा, “हाँ, देता है।” जब वह घर में आया, तो यीशु ने उसके पूछने से पहले उससे कहा, “हे शमौन तू क्या समझता है? पृथ्वी के राजा चुंगी या कर किन से लेते हैं? अपने पुत्रों से या परायों से?” पतरस ने उनसे कहा, “परायों से।” यीशु ने उससे कहा, “तो पुत्र बच गए। फिर भी हम उन्हें ठोकर न खिलाएँ, तू झील के किनारे जाकर बंसी डाल, और जो मछली पहले निकले, उसे ले; तो तुझे उसका मुँह खोलने पर एक सिक्का मिलेगा, उसी को लेकर मेरे और अपने बदले उन्हें दे देना।”

मत्ती 17:14-27 सरल हिन्दी बाइबल (HCV)

जब वे भीड़ के पास आए, तब एक व्यक्ति ने येशु के सामने घुटने टेककर उनसे विनती की, “प्रभु! मेरे पुत्र पर कृपा कीजिए. उन्हें दौरे पड़ते हैं और वह बहुत कष्‍ट में हैं. वह कभी आग में जा गिरते हैं, तो कभी जल में. मैं उन्हें आपके शिष्यों के पास लाया था किंतु वे उन्हें स्वस्थ न कर सके.” येशु कह उठे, “अरे ओ अविश्वासी और बिगड़ी हुई पीढ़ी!” प्रभु येशु ने कहा, “मैं कब तक आप लोगों के साथ रहूंगा, कब तक धीरज रखूंगा? यहां लाइए अपने पुत्र को!” येशु ने उस भूत को फटकारा और वह बालक में से निकल गई और वह बालक उसी क्षण स्वस्थ हो गए. जब येशु अकेले थे तब शिष्य उनके पास आए और उनसे पूछने लगे, “प्रभु! हम उस दुष्टात्मा को क्यों नहीं निकाल सके?” “अपने विश्वास की कमी के कारण,” येशु ने उत्तर दिया, “एक सच मैं आप लोगों पर प्रकट कर रहा हूं: यदि आप लोगों में राई के एक बीज के तुल्य भी विश्वास है और आप लोग इस पर्वत को आज्ञा देंगे, ‘यहां से हट जा!’ तो यह पर्वत यहां से हट जाएगा—असंभव कुछ भी न होगा. यह जाति बिना प्रार्थना और उपवास के बाहर नहीं निकाली जा सकती.” जब वे गलील प्रदेश में इकट्ठा हो रहे थे, तब येशु ने उनसे कहा, “अब मनुष्य का पुत्र मनुष्यों के हाथों में पकड़वा दिये जाएंगे. वे लोग उनकी हत्या कर देंगे. तीसरे दिन वह मरे हुओं में से जीवित किए जाएंगे.” शिष्य अत्यंत दुःखी हो गए. जब वे कफ़रनहूम नगर पहुंचे, तब उन्होंने, जो मंदिर के लिए निर्धारित द्विद्राह्मा कर इकट्ठा करते थे, पेतरॉस के पास आकर पूछा, “क्या आप लोगों के गुरु निर्धारित कर नहीं देते?” “हां, वह देते हैं,” पेतरॉस ने उन्हें उत्तर दिया. घर में प्रवेश करते हुए येशु ने ही पेतरॉस से प्रश्न किया, “शिमओन, मुझे यह बताइए, राजा किनसे कर तथा शुल्क लेते हैं—अपनी संतानों से या प्रजा के लोगों से?” “प्रजा के लोगों से,” पेतरॉस ने उत्तर दिया. “तब तो संतान कर देने से मुक्त हैं.” येशु ने पेतरॉस से कहा; “फिर भी, ऐसा न हो कि वे हमसे क्रुद्ध हो जाएं, झील में जाइए, और अपना कांटा फेंकिए, जो पहली मछली पकड़ में आए उसका मुख खोलिएगा. वहां आपको एक सिक्का प्राप्‍त होगा. वही सिक्का उन्हें अपनी तथा मेरी ओर से कर-स्वरूप दे दीजिएगा.”