मेरी आँखों ने जो कुछ चाहा उन सब को प्राप्त करने से मैं न रुका; मैंने अपने मन को किसी प्रकार के सुख-विलास से वंचित नहीं रखा। मेरा मन मेरे सब परिश्रम के कारण आनंदित हुआ, और यही मेरे सारे परिश्रम का फल था।
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