मारकुस 9:14-24

मारकुस 9:14-24 HINCLBSI

जब येशु और उनके तीनों शिष्‍य अन्‍य शिष्‍यों के पास लौटे, तो उन्‍होंने देखा कि बहुत-से लोग उनके चारों ओर इकट्ठे हो गये हैं और शास्‍त्री उन से विवाद कर रहे हैं। येशु को देखते ही लोग अचम्‍भे में पड़ गये। वे दौड़कर उनके पास आए और उन्‍हें प्रणाम किया। येशु ने उन से पूछा, “तुम लोग इनके साथ क्‍या विवाद कर रहे हो?” भीड़ में से एक ने उत्तर दिया, “गुरुवर! मैं अपने पुत्र को आपके पास लाया हूँ। उसमें एक गूँगी आत्‍मा है। वह जहाँ कहीं उसे पकड़ती है, उसे वहीं पटक देती है। वह फेन उगलता है, दाँत पीसता है और अकड़ जाता है। मैंने आपके शिष्‍यों से उसे निकालने को कहा, परन्‍तु वे ऐसा नहीं कर सके।” येशु ने उत्तर दिया, “अविश्‍वासी पीढ़ी! मैं कब तक तुम्‍हारे साथ रहूँगा? कब तक मैं तुम्‍हें सहता रहूँगा? उस लड़के को मेरे पास लाओ।” वे उसे येशु के पास ले आए। येशु को देखते ही अशुद्ध आत्‍मा ने लड़के को मरोड़ दिया। लड़का गिर गया और फेन उगलता हुआ भूमि पर लोटने लगा। येशु ने उसके पिता से पूछा, “इसकी ऐसी दशा कब से है?” उसने उत्तर दिया, “बचपन से। अशुद्ध आत्‍मा ने इसका विनाश करने के लिए इसे बार-बार आग तथा पानी में गिराया है। यदि आप कुछ कर सकें, तो हम पर तरस खा कर हमारी सहायता कीजिए।” येशु ने उससे कहा, “यदि आप कुछ कर सकें? विश्‍वास करने वाले के लिए सब कुछ सम्‍भव है।” इस पर लड़के के पिता ने तुरन्‍त पुकार कर कहा, “मैं विश्‍वास करता हूँ; मेरे अल्‍पविश्‍वास को दूर करने में मेरी सहायता कीजिए!”