उसने हरएक आराधना में प्रयुक्त होने वाले समस्त स्वर्ण-पात्रों के स्वर्ण की मात्रा निर्धारित की। इसी प्रकार प्रत्येक आराधना में प्रयुक्त होने वाले सब चांदी के पात्रों की चांदी की मात्रा निर्धारित की। उसने बताया कि स्वर्ण दीपाधारों और उनके दीपकों में कितना सोना लगेगा। इसी प्रकार चांदी के दीपाधारों और उनके दीपकों में कितनी चांदी लगेगी। यह मात्रा प्रत्येक दीपक के आराधना में प्रयोग के आधार पर निर्धारित की गई। दाऊद ने निम्नलिखित वस्तुओं में लगने वाले सोने और चांदी की मात्रा भी निर्धारित की : भेंट की रोटी की स्वर्ण-मेजों का सोना, और चांदी की मेजों की चांदी; कांटों, कटोरों और प्यालों का शुद्ध सोना; स्वर्ण-कटोरियों का सोना; चांदी की कटोरियों की चांदी; शुद्ध सोने की धूप-वेदी का सोना। दाउद ने प्रभु की विधान-मंजूषा के ऊपर पंख फैलाए हुए करूबों के स्वर्ण-रथ के नमूने में लगने वाले सोने की मात्रा भी निर्धारित की। दाऊद ने कहा, ‘यह स्वयं प्रभु ने अपने हाथ से लिखकर निर्धारित किया था। मैंने सिर्फ इस निर्धारण के अनुसार कार्य किया।’ तब दाऊद ने अपने पुत्र सुलेमान से यह कहा, ‘शक्तिशाली बन! साहस कर! और निर्माण-कार्य कर। मत डर, और न निराश हो। प्रभु परमेश्वर, मेरा परमेश्वर तेरे साथ है। जब तक प्रभु की आराधना के लिए भवन-निर्माण का कार्य समाप्त नहीं होगा, वह तुझे नहीं छोड़ेगा और न ही तेरा त्याग करेगा। देख, पुरोहितों और उप-पुरोहितों के ये विभिन्न दल हैं, जो भवन में परमेश्वर के आराधना-कार्य को सम्पन्न करेंगे। इनके अतिरिक्त निर्माण-कार्य में दक्ष प्रत्येक व्यक्ति सब कार्यों में प्रसन्नतापूर्वक तुझे सहयोग देगा। सब शासकीय कर्मचारी तथा समस्त जनता तेरे आदेशों का पालन करेगी।’
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