मत्तियाह 25:34-40
मत्तियाह 25:34-40 HCV
“तब राजा अपनी दायीं ओर के समूह की तरफ़ देखकर कहेंगे, ‘मेरे पिता से आशीषित लोगो! उस राज्य के उत्तराधिकार को स्वीकार करिये, जो आप लोगों के लिए सृष्टि की स्थापना के समय से तैयार किया गया है. इसलिये कि जब मैं भूखा था, आप लोगों ने मुझे भोजन दिया; जब मैं प्यासा था, आप लोगों ने मुझे पानी दिया; मैं परदेशी था, आप लोगों ने मुझे अपने यहां स्थान दिया; मुझे वस्त्रों की ज़रूरत थी, आप लोगों ने मुझे वस्त्र दिए; मैं जब रोगी था, आप लोग मुझे देखने आए; मैं बंदीगृह में था, आप लोग मुझसे भेंट करने आए.’ “तब धर्मी इसके उत्तर में कहेंगे, ‘प्रभु! हमने कब आपको भूखा पाया और भोजन दिया; प्यासा देखा और पानी दिया; कब हमने आपको परदेशी पाया और आपको अपने यहां स्थान दिया; आपको वस्त्रों की ज़रूरत में पाया और वस्त्र दिए; हमने आपको कब रोगी या बंदीगृह में देखा और आपसे भेंट करने आए?’ “राजा उन्हें उत्तर देंगे, ‘सच तो यह है कि जो कुछ आप लोगों ने मेरे इन लोगों में से किसी एक के लिए किया—यहां तक कि छोटे से छोटे भाई बहिनों के लिए भी—वह आप लोगों ने मेरे लिए किया.’


