उद्बोधक 10:10-20

उद्बोधक 10:10-20 HCV

यदि कुल्हाड़े की धार तेज नहीं है और आप उसको पैना नहीं करते, तब आपको अधिक मेहनत करनी पड़ेगी; लेकिन बुद्धि सफलता दिलाने में सहायक होती है. और यदि सांप मंत्र पढ़ने से पहले ही डस ले, तो मंत्र पढ़ने वाले का कोई फायदा नहीं. बुद्धिमान की बातों में अनुग्रह होता है, जबकि मूर्खों के ओंठ ही उनके विनाश का कारण हो जाते है. उनकी बातों की शुरुआत ही मूर्खता से होती है और उनका अंत दुखदाई पागलपन होता है. जबकि वह अपनी बातें बढ़ाकर भी बोलते हैं. यह किसी व्यक्ति को मालूम नहीं होता कि क्या होनेवाला है, और कौन उन्हें बता सकते हैं कि उसके बाद क्या होगा? मूर्ख की मेहनत उन्हें इतना थका देती है; कि उन्हें नगर का रास्ता भी पता नहीं होता. धिक्कार है उस देश पर जिसका राजा एक कम उम्र के युवक हैं और जिसके शासक सुबह से ही मनोरंजन में लग जाते हैं. परंतु धन्य है वह देश जिसके राजा कुलीन वंश के हैं और जिसके शासक ताकत के लिए भोजन करते हैं, न कि मतवाले बनने के लिए. आलस से छत की कड़ियों में झोल पड़ जाते हैं; और जिन व्यक्ति के हाथों में सुस्ती होती है उनका घर टपकने लगता है. लोग मनोरंजन के लिए भोजन करते हैं, दाखमधु जीवन में आनंद को भर देती है, और धन से हर एक समस्या का समाधान होता है. अपने विचारों में भी राजा को मत धिक्कारिएगा, और न ही अपने कमरे में किसी धनी व्यक्ति को शाप दीजिएगा, क्योंकि हो सकता है कि आकाश का पक्षी आपकी वह बात ले उड़े और कोई उड़नेवाला जंतु उन्हें इस बारे में बता दे.