ऐहनङे यसैया अगमबानी करैबलाके लिखल किताबके बातसब,
“उजार जगहमे एकटा लोक जोरसे कैहरहल छै,
‘परभु आबैबला रस्ता दुरुस कर,
उ चलैबला रस्तासब सोझ कर!
सब खाइध-खुइध सैर हेतौ,
हिमाल आ पहारसब सैर हेतौ,
टेढ घोंच रस्तासब सोझ हेतौ आ बिगरल रस्तासब सैर हेतौ।
तब सब लोकसब परमेस्वरके मुक्ती देख्तै।’”